महाशिवरात्रि पर्व 26 फरवरी को मनाया जाएगा, उस दिन शिवभक्त रखेंगे व्रत |
| पंडित विवेक कुमार मिश्र |
महादेव कि आराधना करने से मिलता है पूर्ण फल - पं. विवेक कुमार मिश्र
प्रतापगढ़ । श्री राधे कृष्ण युवा दल सेना के संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष पं. विवेक कुमार मिश्र ने महाशिवरात्रि पर्व एवं व्रत कि महत्ता के बारे मे बताते हुए कहा कि शिवरात्रि का पर्व साल में दो बार व्यापक रुप से मनाया जाता है, एक फाल्गुन मास में तथा दूसरा श्रावण मास में, फाल्गुन मास की शिवरात्रि को महाशिवरात्रि के नाम से मान्यता है। महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस बार महाशिवरात्रि का पावन पर्व दिनाँक 26 फरवरी दिन बुधवार को पड़ रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि पौराणिक कथाओं के अनुसार फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को ही भगवान शिव जी और माता पार्वती जी का विवाह हुआ था, इसी कारण महाशिवरात्रि को बहुत ही पवित्र पर्व माना जाता है। इस दिन भगवान शिव को मनाने और उनकी कृपा पाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना गया है।महाशिवरात्रि के दिन निशित काल में पूजा करने का महत्व माना गया है. क्योंकि मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान शिव पृथ्वी पर शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे, वह निशितकाल का ही समय था. यही कारण है कि भगवान शिव की विशेष पूजा के लिए निशितकाल को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है
अमृत का उत्पादन करने के लिए निश्चित था, लेकिन इसके साथ ही हलाहल नामक विष भी पैदा हुआ था। हलाहल विष में ब्रह्माण्ड को नष्ट करने की क्षमता थी और इसलिए केवल भगवान शिव इसे नष्ट कर सकते थे। भगवान शिव ने हलाहल नामक विष को अपने कण्ठ में रख लिया था। जहर इतना शक्तिशाली था कि भगवान शिव अत्यधिक दर्द से पीड़ित हो उठे थे और उनका गला नीला हो गया था। इस कारण से भगवान शिव 'नीलकण्ठ' के नाम से प्रसिद्ध हैं। उपचार के लिए, चिकित्सकों ने देवताओं को भगवान शिव को रात भर जगाये रहने की सलाह दी। इस प्रकार, भगवान शिव के चिन्तन में एक सतर्कता रखी। शिव को आनंदित करने और जागाये रखने के लिए, देवताओं ने अलग-अलग नृत्य और संगीत बजाये। जैसे सुबह हुई, उनकी भक्ति से प्रसन्न भगवान शिव ने उन सभी को आशीर्वाद दिया। शिवरात्रि इस घटना का उत्सव है, जिससे शिव ने दुनिया को बचाया। तब से इस दिन, भक्त उपवास करते है।
भगवान शिव केवल एक लोटा जल और बेलपत्र अर्पित करने से ही प्रसन्न हो जाते हैं, इसलिए उन्हें भोलेनाथ और आशुतोष भी कहा जाता है। गृहस्थ जीवन जीने वाले लोग महाशिवरात्रि को शिव जी के विवाह की वर्षगांठ के रूप में मनाते हैं। महत्वाकांक्षी लोग इसे उस दिन के रूप में देखते हैं, जब शिव जी ने अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त जब शिव जी ने अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त किया था, परन्तु योगिक परंपरा में हम शिव जी को एक ईश्वर की तरह नहीं पूज्यते बल्कि प्रथम गुरु या आदि गुरु के रूप में पूज्यते हैं!
भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए महाशिवरात्रि के दिन कई उपाय किये जाते हैं जिसमे शिव जी को तीन पत्तों वाला 108 बेलपत्र चढ़ाया जाता है! महादेव को भांग अतिप्रिय है, भांग को दूध में मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं, धतुरा और गन्ने का रस शिव जी को अर्पित करें! इससे जीवन में सुख समृद्धि बढ़ती है, जल में गंगाजल मिलाकर शिवलिंग पर अर्पण करने से मन की अशांति दूर होती है! महाशिवरात्रि को भगवान शंकर को पंचामृत से स्नान कराएं! अंत मे केसर के 8 लोटे जल चढ़ाएं !सम्पूर्ण रात्रि तक दीपक जलाएं! चंदन का तिलक लगाएं, बेलपत्र, भांग, धतूरा, गन्ने का रस, तुलसी, जायफल, कमल गट्टे, फल, मिष्ठान, मीठा पान, इत्र व दक्षिणा चढ़ाएं!
अन्त में केसर युक्त खीर का भोग लगा कर प्रसाद बांटें तथा ? नमो भगवते रूद्राय, ? नमः शिवाय रूद्राय् शम्भवाय् भवानीपतये नमो नमः मंत्र का जाप करें! इस दिन शिव पुराण का पाठ व महाशिवरात्री के दिन रात्रि जागरण करने से भक्तों कि सभी मनोकामनायें पूर्ण होती है
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